Amazing Story (कहानी) छुवा छूट की कहानी

सुबह मलिया जागकर जल्दी से अपनी टूटी फूटी झोपड़ी में झाड़ू लगाई और जल्दी से आंगन में रखे बाल्टी भर पानी से नहाकर थोड़ा पानी उसी बाल्टी में छोड़कर आंगन से ही आवाज दी रत्ती …. रत्ती मलिया के बेटे का नाम था

रत्ती का उम्र बमुश्किल से सात साल होगा । मलिया का पति छोटे की मौत पिछले साल जहरीली शराब पिने से हो गई थी ,

मलिया का पति छोटे बस स्टैंड पर स्तिथ शौचालय का सफाई का काम करता था , पति के गुजरने के बाद ठीकेदार ने मलिया को काम पर रख लिया ।

मलिया का घर भी बसस्टैण्ड के पीछे स्तिथ झोपड़पट्टी में था, मलिया शौचालय और नाले की सफाई कर किसी तरह अपने और बच्चे का पेट पाल रही थी

आज त्योहार का दिन था आज के दिन यह झोपड़पट्टी वाले लोग बड़े लोगों के मोहल्ले में जाते थे जहां उन्हें खाने पीने का सामान मिलता था , मलिया भी इसी के लिए सुबह तैयार हो रही थी
रत्ती माँ के बुलाने पर आंगन में आ गया , मलिया रत्ती को जल्दी जल्दी नहलाकर घर में रखे साफ कपड़े पहनाई

रत्ती तैयार होने के बाद मलिया की नजर में किसी राजकुमार से कम नही था ..मलिया ने बक्से से टुटे शीशे के टुकड़े जो शायद किसी आईना का ही था निकाल अपना बाल ठीक की और रत्ती को काजल का टीका लगा दी रत्ती भी आईने में अपने चेहरे को देखकर अपनी माँ को कहा माई मैं तो सुंदर लग रहा हूँ

मलिया ने हंसते हुए रत्ती को काजल का टिका लगाया और एक फटे झोले में एक थाली और कटोरा रखकर रत्ती की उंगली पकड़ बड़े लोगों के मोहल्ले की तरफ बढ़ गई

एक बड़े घर के पास जाकर मलिया गेट के बाहर से आवाज लगाई … बड़ी मालकिन … बड़ी मालकिन

अंदर से आवाज आई रुको बाहर अभी आती हूं दरवाजे को हाथ मत लगाना
रत्ती भी अपने माँ के साथ गेट के बाहर खड़ा था
रत्ती बार बार गेट को छूने की कोसिस करता था लेकिन मलिया कसकर हाथ पकड़ी हुई थी

इतने में गेट खुला लेकिन ये क्या गेट खुलते ही बड़ी मालकिन का पालतू कुत्ता बाहर की ओर निकलकर भागा
मालकिन कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे दौर लगाई
इस अफरा तफरी में रत्ती कब गेट के अंदर चल गया मलिया देख नही पाई

तभी मालकिन कुत्ते को गोद मे लेकर लौटी और मलिया को बोली थोड़ा रुको मैं इसको नहलाकर तुम्हे खाना देती हूं … कहते हुए मालकिन गेट के अंदर चली गयी

तभी मालकिन की आवाज गूंजी … मालियाआयय…
तुम्हारा बच्चा अंदर कैसे आ गया …

अब तो मुझे सारा बरामदा धोना पड़ेगा … तभी अंदर से रत्ती रोते हुए बाहर आया …

मलिया ने रत्ती को डांटते हुए बोली अंदर क्यों गया ..

कुछ छुआ तो नही …रत्ती सुबकते हुए ना में गर्दन हिलाई और मलिया के आंचल में छिप गया …रत्ती को डर लग रहा था कहीं बड़ी मालकिन फिर न डांटे …

अंदर से मालकिन की तेज आवाज बाहर आ रही थी

…अब पूरा बरामदा धोना पड़ेगा …मलिया के बच्चे ने सारा घर को छुवा दिया … ये गंदे लोग कभी नही सुधर सकते …फिर कुत्ते के पुचकारने की आवाज आई …

चलो तुमको नहवा देती हूं
कुछ देर बाद बड़ी मालकिन गोद में कुत्ते को लेते हुए गेट से बाहर आई , मालकिन के एक हाथ मे पोलोथिन में कुछ पूरी और सब्जी थी …

मालकिन जैसे बाहर आई मलिया ने थाली निकालकर रख दी और मालकिन ने दूर से ही खाने वाली पोलोथिन मलिया के थाली में फेंक दी

मलिया खाना लेकर बेटे के साथ घर पहुची … घर पहुचते ही रत्ती टूटे हुए आईना में अपना चेहरा देखने लगा…फिर अपनी मां से सुबकते हुए पूछा ..

माई बड़ी मालकिन का कुत्ता मुझसे ज्यादा सुंदर था क्या … मलिया ने बेटे का आँशु पोछते हुए कहा नही रे …तो माई बड़ी मालकिन ने मुझे क्यों डांटा …

और कुत्ते को तो गोद में उठाई थी हमलोग को खाना भी फेककर दिया …. मलिया कुछ नही बोली बस रत्ती को अपने सिने से लगाकर अपनी आँशु को रोकने की कोसिस कर रही थी ….

वो रत्ती को ये कैसे बताती की वो लोग बड़े लोग है और भगवान ने इंसान तो बनाया लेकिन धरती पर रह रहे लोगों के द्वारा बनाई गई जाती सरंचना के कारण मलिया छोटे जाती की है और जिस जाती से है उसे छूत माना जाता है…

जबकि कद काठी , रंग , खून का रंग , चेहरा सब एक है लेकिन अमीरी गरीबी की खाई ने छुआ छूत की प्रथा को जन्म दिया शायद इसी छूआ छूत के कारण पालतू कुत्ता भी हमसे ज्यादा श्रेष्ठ है….

 

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